ईश्वरीय सेवा करने की 108 विधियाँ | 108 ways of doing service ईश्वरीय सेवा करने की 108 विधियाँ | 108 ways of doing service पिछले रविवार की मुरली में बाबा ने कहा… सबमें विशेषताएं हैं, उन्हें सिर्फ कार्य में लगाना है, तो सहज सफलता मिल जाएंगी… तो आज आपको 108 सेवा-योग्य विशेषताएं भेज रहें हैं, इनमें से कोई एक द्वारा भी स्वयं और सर्व का कल्याण कर सकते … इन्हें प्रेम से स्वीकार करना जी! मन्सा सेवा शुभ भावना , सकाश, दुआ, वरदान देना योग द्वारा वातावरण शुध्द करना दृष्टि देना वाचा सेवा ज्ञान सुनाना, अनुभव सुनाना, निमन्त्रण देना, भाषण (कोर्स, मुरली , स्पेशल प्रोग्राम) करना, स्पीकर का इंट्रो देना कमेंटरी द्वारा योग कराना कर्मणा सेवा स्टेज-माइक-म्यूजिक-लाइट वा audience सम्भालना… हॉल की सफाई, खुर्सी सेट करना भोजन बनाना (रोटी, टोली बनाना-पैक करना, सब्जी काटना-बनाना) टोली देना… कुछ समय गाड़ी देना, ड्राइव करना मधुबन में यज्ञ-सेवा करना, गाइड बनना सम्बन्ध-सम्पर्क से किसी को ले आना (प्रोग्राम पे, सेन्टर वा मधुबन) औरों को सेवा सिखाना, चान्स देना, आगे बढ़ाना वि...
This time comes after a long tapasya and we people of India and world having happiness for ever with various culture